Episode 1
मुंबई की रातें हमेशा जागती रहती हैं।
ऊँची इमारतों के बीच चमकती नीली रोशनी में शहर थमता नहीं, बस बहता रहता है।
लेकिन उस रात — हवा में एक अजीब सन्नाटा था।
कमिश्नर अंजलि मेनन अपने ऑफिस में बैठी थीं। फाइलों के बीच Laser Roy के केस की रिपोर्ट खुली थी।
अंजलि: “तीन महीने हो गए… शहर में शांति है, लेकिन मुझे ये शांति झूठी लगती है।”
इंस्पेक्टर देव राणा: “मैम, Laser Roy अब सरकार के अधीन काम कर रहा है। उसने कई ऑपरेशन में मदद की है।”
अंजलि: “मदद? या नियंत्रण? देव, वो आदमी एक चलते-फिरते हथियार की तरह है। और जहाँ हथियार होते हैं, वहाँ कभी शांति नहीं रहती।”
बाहर से आवाज़ आई — “मैम, एजेंट कबीर खन्ना आपसे मिलना चाहते हैं।”
दरवाज़ा खुला।
काले सूट में खड़ा एजेंट कबीर अंदर आया। उसके हाथ में एक नीली चिप थी।
कबीर: “Commissioner Menon, हमें Dr. Williamson के पुराने प्रयोग से जुड़ी कुछ जानकारी मिली है।”
अंजलि: “वो तो जेल में है।”
कबीर: “हाँ, लेकिन Project Omega का डेटा पूरी तरह नष्ट नहीं हुआ। हमें उस सिस्टम में किसी ने हाल ही में एक्सेस किया है।”
देव राणा: “मतलब कोई अंदर से Williamson के फाइलों को खोल रहा है?”
कबीर: “बिलकुल। और उस IP ट्रेस से लगता है कि कोई यूनिवर्सिटी लैब से एक्सेस कर रहा है… शायद वही जगह जहाँ James Roy पहले काम करता था।”
कमिश्नर ने तुरंत फोन उठाया —
“Laser Roy को लोकेट करो। अभी।”
जेम्स रॉय (Laser Roy) इस समय मुंबई के उपनगर में एक पुरानी फैक्ट्री में था।
अमजद उर्फ Solid Arm अपने नए मैकेनिकल आर्म में कुछ एडजस्टमेंट कर रहा था।
अमजद: “भाई, ये नया मॉडल अमेरिकन टेक्नोलॉजी पर बेस्ड है। झटका थोड़ा ज़्यादा है, लेकिन ताकत दुगनी।”
जेम्स: “बस ये झटका किसी बेगुनाह को न लगे। याद रख, हम हत्यारे नहीं हैं।”
अमजद: “तू तो अब भी वैसा ही है — सीधा-सादा। पर दुनिया उतनी साफ़ नहीं रही जितना तू सोचता है।”
जेम्स ने खिड़की से बाहर झांका।
दूर फैक्ट्री की छत पर नीली किरणें चमक रही थीं — Laser Gauntlet उसके हाथ में हल्की चमक दे रहा था।
वो वही हथियार था जो अब उसकी पहचान बन चुका था।
तभी एक हल्की दस्तक हुई।
जेम्स: “कौन?”
आवाज़: “रीना हूँ… रीना चोपड़ा।”
रीना, यूनिवर्सिटी की लैब असिस्टेंट — जो पहले Dr. Williamson के अधीन काम करती थी।
उसके चेहरे पर डर और बेचैनी दोनों थे।
रीना: “James… तुम्हें कुछ बताना है। Project Omega फिर से शुरू किया गया है।”
जेम्स: “क्या? वो प्रोजेक्ट तो नष्ट कर दिया गया था।”
रीना: “नहीं। Dr. Mehra ने उसे रीस्टार्ट किया है। और इस बार, वो इसे किसी इंसान पर नहीं… मशीन पर टेस्ट कर रहा है।”
अमजद: “मतलब एक साइबर-मॉन्स्टर?”
रीना: “हाँ, और वो चीज़… समय को नियंत्रित कर सकती है।”
जेम्स की आँखों में सख्ती उतर आई।
जेम्स: “Time control? ये किसी भी शक्ति से ज़्यादा खतरनाक है।”
रीना: “Dr. Mehra को सरकार ने फंड नहीं दिया, तो उसने जनरल रावण से हाथ मिला लिया है। अब वो Project Omega को हथियार बना रहे हैं।”
अमजद: “जनरल रावण… वो आदमी तो सब कुछ बेच सकता है।”
रीना ने एक चिप आगे बढ़ाई।
“ये Project Omega का डेटा है। लेकिन इसे डिकोड सिर्फ़ प्रोफेसर राजवीर सैनी कर सकते हैं।”
जेम्स: “प्रोफेसर सैनी… वही जो Quantum Energy पर काम करते हैं?”
रीना: “हाँ, और उन्होंने ही तुम्हारे Laser Gauntlet का बेसिक डिज़ाइन बनाया था।”
अमजद ने जेम्स की तरफ़ देखा।
“लगता है फिर से शहर जलने वाला है, भाई।”
जेम्स: “नहीं। इस बार नहीं। जब तक मैं ज़िंदा हूँ, कोई भी Omega को हथियार नहीं बनाएगा।”
दूसरी ओर, जेल के अंदर —
Dr. Williamson अपने सेल में बैठे थे। उनकी आँखों में अजीब-सी शांति थी, जैसे कोई तुफ़ान अंदर छिपा हो।
एक गार्ड आया।
गार्ड: “तुम्हारे लिए कोई आया है।”
जेल के रौशन कमरे में Dr. Mehra खड़ा था।
Mehra: “विलियमसन, मैं तुम्हारे अधूरे काम को पूरा करने आया हूँ।”
Williamson: “Project Omega?”
Mehra: “हाँ। और इस बार किसी सरकार की नहीं, हमारी अपनी दुनिया की शक्ति के लिए। तुम चाहो तो मेरे साथ चलो।”
Williamson: “मैंने इंसान को ताकत देने की कोशिश की थी, तू उसे गुलाम बनाना चाहता है।”
Mehra: “हर ताकत गुलामी से शुरू होती है, विलियमसन।”
Dr. Mehra ने एक छोटी डिवाइस निकाली और जेल के सिस्टम को हैक कर दिया।
सायरन बज उठा।
विलियमसन के सेल का दरवाज़ा खुल गया।
Williamson: “तू गलत रास्ता चुन रहा है, मेहरा।”
Mehra: “नहीं, मैं वही कर रहा हूँ जो तूने शुरू किया था।”
जेल में अफरा-तफरी मच गई। दोनों बाहर भागे।
लेकिन विलियमसन की चाल धीमी हो गई।
Mehra: “चलो, जल्दी करो।”
Williamson: “नहीं… मुझे अब भागना नहीं। अब मैं किसी और के लिए नहीं, अपनी बेटी के लिए जियूँगा।”
Dr. Mehra भाग गया। Williamson वहीं रुक गए और खुद को समर्पित कर दिया।
लेकिन जाते-जाते उन्होंने एक बात कही —
“अगर Omega सक्रिय हुआ, तो Laser Roy ही उसे रोक सकेगा।”
अगली सुबह।
मुंबई यूनिवर्सिटी – Quantum Lab
प्रोफेसर राजवीर सैनी अपनी रिसर्च में डूबे थे, जब जेम्स, रीना और अमजद वहाँ पहुँचे।
राजवीर: “जेम्स रॉय… मैंने सुना था तुम सरकार के साथ काम कर रहे हो।”
जेम्स: “मैं सच के साथ काम करता हूँ, प्रोफेसर। और ये चिप Project Omega की है।”
राजवीर: “Omega? ये नाम फिर से क्यों सुन रहा हूँ?”
रीना: “क्योंकि Dr. Mehra ने इसे दोबारा शुरू किया है।”
कहानी जारी है ..................
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